September 26, 2020

चुनाव-2019 हल्के के बडे राजनीतिक दिग्गज नहीं खोल रहे अपने पत्तेपार्टियों के साथ ने चलने से हो सकता है पार्टियों को भारी नुक्सान

कुराली/गुरसेवक: जैसे जैसे लोक सभा चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे अलग अलग पार्टियों के नेताओ द्वारा वोटरों को अपनी और आकर्षित करने के लिए कई तरह के कदम उठाये जा रहे है पर कही न कही हल्के में ऐसे भी कई बडे दिग्गज नेता है जो अभी तक शांत बैठे है और किस उमीदवार के पक्ष में वोट करनी है किसे नहीं अपने पत्ते नहीं खोल रहे । उनके शांत बैठने से उनके समर्थक भी दुविधा में फसे हुए है कि इस चुनाव में किस पार्टी की मदद की जाये। आईये ऐसे नेताओ के बारे में कुछ बतातेे है।
पूर्व स्पीकर रविंदर सिंह दुमना
5 बार विधायक और 2 बार विधान सभा स्पीकर रह चुके शिक्षा के दानी नाम से मशहूर पूर्व स्पीकर रविंदर सिंह दुमना जिनकी देख रेख में 6 खालसा स्कूल चल रहे है और ये अक्सर बादल परिवार पर टिप्पणियां कस्ते हुए भी नजर आते है इनकी कैप्टन अमरिंदर सिंह से मित्रता भी जग जाहिर है और इस हल्के में आम आदमी पार्टी के उमीदवार नरिंदर शेरगिल के पिता भजन सिंह भी इनके काफी अच्छे मित्र है। इन्होने इस बार अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले कि इस बार किस पार्टी या किस उमीदवार के पक्ष में वोट की जाये पर इनके साथ आज भी गाँवो शहरों का बडा काफिला इनके आदेशों की पालना करते हुए वोट करता है।
विधायक कँवर संधू
अपनी निडर पत्रकारी से पहचान बना चुके कँवर संधू को हल्का खरड से विधान सभा टिकट दी गयी थी जिस उपरान्त वह इस सीट से विजेता बने थे। उसके बाद खुद मुखतयारी और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर उनकी खटास आम आदमी पार्टी की सीनयर लीडरशीप से दिख रही थी । जिस कारण वह कुछ समय के लिए सुखपाल खैहरा के साथ मंच साँझा करते हुए देखे जाते थे पर वह आज भी अपने आप को विधायक आम आदमी पार्टी का कहने से भी गुरेज नहीं करते। इस लोक सभा चुनाव में वह अभी तक शांत ही बैठे है और किसी के पक्ष में प्रचार नहीं कर रहे। जिस कारण आम आदमी पार्टी को कुछ न कुछ नुक्सान झेलना पड सकता है।
मैडम लखविंदर कौर गरचा
कैप्टन अमरिंदर सिंह की पूर्व ओएसडी मैडम लखविंदर कौर गरचा हल्का खरड में काफी सक्रिय है । उनकी पहुँच हल्का खरड के लगभग हर घर तक हो चुकी है और वह हल्के के लोगो की सेवा करने के लिए भी ततपर रहती है पर पिछले विधान सभा चुनाव से मात्र एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी ने उन्हें किसी बात को लेकर पार्टी से निष्काषित कर दिया था। जिस के उपरांत कांग्रेस ने हल्का खरड में जीती हुई बाजी मात्र 2000 के करीब वोटो से हार गवा दी थी। मैडम गरचा को तब से लेकर अब तक कांग्रेस में शामिल नहीं किया गया। हलाकि हल्के के लोग आज भी उनके साथ चल रहे है इस लिए मैडम गरचा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले कि इस चुनाव में किस उमीदवार के पक्ष में वोट डलवाई जाये पर मैडम गरचा अगर कांग्रेस में शामिल नहीं होते तो कांग्रेस को इसका नुक्सान झेलना जरूर पड सकता है।
नौजवान अकाली नेता गुरप्रताप सिंह पडियाला
पडियाला परिवार के नाम से प्रचलित नौजवान अकाली नेता गुरप्रताप सिंह पडियाला नौजवानो के दिलो की धडकन रहे है । जब भी वह क्षेत्र में किसी काम को करवाने के लिए निकलते थे तो उनके साथ नौजवानो का वडा समूह कंधे से कंधा मिला साथ चलता था। इनकी नानी दलजीत कौर शिअद बादल पार्टी के निशान पर विधान सभा चुनाव लड विधायक बनी थी। गुरप्रताप के मामा राजबीर सिंह पडियाला ने काफी समय अकाली दल में सेवा की पर उनके स्वर्गवास के बाद उनके भांजे गुरप्रताप सिंह पडियाला ने क्षेत्र निवासियों की सेवा करने की कमान संभाली । बीते विधान सभा चुनाव में उन्हें शिअद बादल की तरह से उमीदवार उतारने के कयास लगाये जा रहे थे पर अंतिम समय में उनकी जगह किसी और उमीदवार को इस सीट से उतारा गया। उसके बाद से वह राजनीति में कुछ शांत हो गए पर आज भी हल्का खरड व् जिला मोहाली में उनके काफी समर्थक है जो उनके एक इशारे पर हार जीत का फैसला तक करते है पर इस चुनाव में अभी तक गुरप्रताप की और से कोई पत्ते नहीं खोले गये कि किस उमीदवार का साथ दिया जाये जिस कारण शिअद को इसका नुक्सान झेलना पड सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *