September 30, 2020

क्यों विजेता बने तिवारी,क्यों हारे चंदूमाजरा,क्यों आप अर्श से पहुंची फर्श पर,क्यों सोढी बने चर्चा का विषय, क्यों टकसाली उमीदवार पर नहीं जताया गया भरोसा

           कुराली/ लोक सभा हल्का श्री आनंदपुर साहिब में 15 लाख से अधिक वोटर है जिनमे से 7.50 लाख के करीब महिला वोटर जब की 8 लाख से अधिक पुरष वोटर है। वही श्री आनंदपुर साहिब सीट के 9 विधान सभा क्षेत्रों में से कांग्रेस के पाले में 5 आप के 3 व् शिअद के खाते में 1 सीट है। इस लोक सभा चुनाव में हर राजनीतिक पार्टी अपने अपने उमीदवारो की जीत के दावे कर रही थी। इन्ही सवालों पर नजर रख हमने जब इस चुनाव में मिली जीत हार का सर्वेक्षण किया तो ये नतीजे निकल सामने आये।


मनीष तिवारी के हक में एक जुट दिखे कांग्रेसी


 

मनीष तिवारी

जैसे हो कांग्रेस ने इस हल्के से मनीष तिवारी को लोक सभा उमीदवार बनाया तभी से कांग्रेसी नेताओ से लेकर वर्करों तक एक जुट दिखाई दिए हलांकि सभी कांग्रेसी नेता अपने अपने दलों के साथ अलग अलग प्रचार करते दिखे पर उनका मकसद एक ही दिखाई दिया। जिस कारण मनीष तिवारी इस सीट से 4 लाख 26 हजार 904 वोट प्राप्त कर विजेता बने हलाकि जब कुछ झूठे या सच्चे वीडियो मनीष तिवारी के वायरल हुए उस कारण कांग्रेस का वोट बैंक जरूर खिसका पर आखिर मे वह विजेता बने।


मोदी फेक्टर चला पर ‘आप’का वोट बैंक कम होना चंदूमाजरा के लिए बना हार का कारण


लोक सभा हल्का श्री आनंदपुर साहिब से पूर्व संासद प्रो प्रेम सिंह चंदुमजारा के हक में मोदी नाम का फेक्टर जरूर चला जिस कारण क्षेत्र में प्रधान मंत्री मोदी के नाम के सहारे कुल 3 लाख 79 हजार 552 वोट चंदुमजारा को पडी पर कोई भी बडा प्रोजेकट न लाना,जीतने के बाद हल्के के लोगो में कम विचारणा, इस क्षेत्र में आम आदमी पार्टी का जायदा कम हुआ वोट बैंक, चुनाव समय कई अकाली व् भाजपा पार्षदों का कांग्रेस से जुडना भी चंदुमजारा को जीत से दूर ले गया।


आप’ अर्श से पहुंची फर्श पर


      पिछले लोक सभा चुनाव में 3 लाख 6 हजार के करीब वोट ले चुकी आम आदमी पार्टी इस सीट से चुनाव परिणाम से पहले ही पिछडी हुई दिखाई दे रही थी। बेशक नरिंदर सिंह शेरगिल यहाँ से जीत के बडे बडे दावे करते नजर आ रहे थे पर असल में हल्का खरड कें विधायक कँवर संधू का वोटरों के साथ कम विचारणा,रोपड से विधायक अमरजीत सिंह संधोआ का कांग्रेस में शामिल हो जाना,लोक सभा हल्के में ‘आप’ के वर्करों का कई गुटों में बट जाना ,शेरगिल द्वारा लोगो के फोन न उठाना,चुनाव के समय खाली पडे बूथ पर वालंटियर का न बैठना,पार्टी का बूथ स्तर तक ढांचा न बनाना कही न कही ‘आप’ को अर्श से फर्श तक ले आया जिसकारण उन्हें यहाँ से केवल 52 हजार                          539 वोट मिले।


पीडीए उमीदवार सोढी बने चर्चा की विषय


 

पीडीए और बीएसपी

विक्रमजीत सिंह सोढी

के सांझे उमीदवार विक्रमजीत सिंह सोढी जो पंजाब में सबसे जायदा 140 करोड के आमदन के मालिक थे जो उन्होंने अपने हलफनामे में दर्शाया था जिस कारण वह चर्चा में बने रहे सोढी ने अंतिम समय में जब 1 लाख 46 हजार सतहत्तर के करीब वोट प्राप्त हुई तो उसके बाद वह चर्चा में और भी छा गए। क्योकि सोढी द्वारा कम समय मिलने के उपरान्त भी उन्होंने काफी वोट इस हल्के से प्राप्त किये जब की वह कई हल्के के गाँवो शहर में एक भी छोटी बडी मीटिंग नहीं कर पाए थे ।

 


टकसाली उमीदवार को पडे नोटा से भी कम वोट


 

बीरदविंदर सिंह

बेशक टकसाली उमीदवार बीर दविंदर सिंह द्वारा अक्सर मीटिंगो में अधिकतर यह कहा जाता था कि चंदूमाजरा तो उनके लिए कोई माजरा ही नहीं है पर परिणाम आने के बाद से ही टकसाली वर्करों में निराशा दिखाई दी। बार बार पार्टिया बदलने वाले टकसाली उमीदवार बीरदविंदर सिंह पर लोगो ने विशवास नहीं जताया । इस लिए उन्हें मात्र 10 हजार 315 के करीब वोट लेकर ही सिमित रहना पडा जब की उनसे जायदा वोट तो नोटा को पडे हलाकि लोगो का यह भी मानना था कि अगर बीरदविंदर की जगह जत्थेदार उजागर सिंह बडाली चुनाव लडते तो वह इस सीट से और भी अधिक वोट ले सकते थे ।

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